गेहूं की फसल के लिए 50 से 80 दिन का समय अत्यंत महत्वपूर्ण
देश के विभिन्न हिस्सों में गेहूं की फसल वर्तमान में 50 से 80 दिनों की महत्वपूर्ण अवस्था में पहुंच चुकी है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यह वह समय है जब गेहूं ‘गबोट’ (बालियां निकलने की शुरुआती अवस्था) में होता है। इस दौरान सही खाद और उर्वरकों का चयन न केवल बालियों की लंबाई बढ़ाता है, बल्कि दानों को चमकदार और वजनदार भी बनाता है। यदि किसान वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करें, तो प्रति हेक्टेयर 80 क्विंटल तक पैदावार हासिल करना संभव है।
फसल का पीलापन दूर करने का अचूक नुस्खा
उत्तर भारत में पड़ रही कड़ाके की ठंड और धुंध के कारण कई खेतों में गेहूं पीला पड़ रहा है। इस समस्या के समाधान के लिए विशेषज्ञ ने एक सस्ता और प्रभावी ‘फुलर स्प्रे’ (Foliar Spray) फॉर्मूला बताया है। प्रति एकड़ के लिए:
ज्यादा हाइट वाली किस्मों (DBW 303 आदि) का प्रबंधन
DBW 303, DBW 187 और WS 1270 जैसी अधिक ऊंचाई वाली किस्मों में फसल के गिरने (Lodging) का खतरा रहता है। यदि फसल गिर गई, तो उत्पादन 30-40% तक घट सकता है। इससे बचने के लिए जब फसल 50-55 दिन की हो, तब लियोसिन (Lihocin) पीजीआर का 2 मिली प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करना चाहिए। इससे तना मजबूत होता है और फसल अंत तक खड़ी रहकर पकती है।
बालियां निकलने के समय क्या डालें? (NPK 0:52:34 और कैल्शियम नाइट्रेट)
जब गेहूं की फसल गबोट अवस्था में हो, तब बेहतर दानों के भराव के लिए निम्नलिखित उर्वरकों का प्रयोग करें:
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कैल्शियम नाइट्रेट: 10 से 15 किलो प्रति एकड़ जमीन में दें। इससे तना मजबूत होता है और पौधों को नाइट्रोजन की भी आपूर्ति होती है।
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NPK 0:52:34 का स्प्रे: बालियां बाहर आने से ठीक पहले इसका स्प्रे करें। इसमें मौजूद पोटाश दानों को बोल्ड बनाता है और फास्फोरस जड़ों व बालियों को मजबूती देता है। यह स्प्रे फसल को मौसमी तनाव और गर्म हवाओं से भी बचाता है।